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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह कार्यवाह भैया जी जोशी ने कहा ईश्वरीय शक्ति का संकल्प सदैव पूरा होता है
November 16, 2019 • विशेष संवाददाता • आरएसएस न्यूज
ईश्वरीय शक्ति का संकल्प सदैव पूरा होता है – भय्याजी जोशी
वाशी, मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश उपाख्य भय्याजी जोशी ने कहा कि विश्व में केवल ईश्वरीय शक्ति का संकल्प पूरा होता है, आसुरी शक्ति का संकल्प कदापि पूरा नहीं होता. कई बार यह आसुरी शक्ति हमें प्रभावी होती दिखाई देती है, परंतु वह विजयी नहीं होती.

 

वाशी में सुरेश हावरे जी द्वारा लिखित 'शिदोरी' पुस्तक का भय्याजी जोशी तथा इतिहास संशोधक, लेखक बाबासाहब पुरंदरे ने लोकार्पण किया. मराठी के ज्येष्ठ लेखक मधु मंगेश कर्णिक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे.

सरकार्यवाह जी ने कहा कि भारत में हिन्दू, इस नाते से जन्म लेना यह हम सब का सौभाग्य है. ईश्वरीय शक्ति हमारी परीक्षा लेती है. ठीक उसी तरह भगवान श्रीराम ने सैकड़ों वर्षों तक हमारी परीक्षा ली है. हम राम मंदिर प्रत्यक्ष साकार होता हुआ देख पाएंगे, यह भी हमारा सौभाग्य ही है. लगभग साढ़े तीन सौ से चार वर्षों की परतंत्रता से स्वतंत्र होकर हम आज समृद्धि की ओर चल पड़े हैं. सत्य संकल्प का दाता प्रत्यक्ष ईश्वर ही है. मंदिर अवश्य बनेगा. सौभाग्य से इस परिवर्तन से, ईश्वरीय मालिका से हम जुड़ गए हैं. हावरे जी की रामभक्ति का प्रभाव है, कि उन्हें यह अवसर प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि हावरे जी यह एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं. वे वैज्ञानिक भी हैं और ईश्वर की भक्ति भी करते हैं. एक महत्त्वपूर्ण देवस्थान का दायित्व संभालने से उनकी भक्ति प्रकट होती है. जिस तरह यात्रा शुरू करते वक्त हम 'शिदोरी' (यातायात का खानपान) लेकर जाते हैं, वैसे ही सुरेश हावरे जी द्वारा लिखी यह पुस्तक 'शिदोरी' जीवन में हमें सहाय्यभूत रहेगी. हमारे जीवन को दिशा देगी.

बाबासाहब पुरंदरे जी ने कहा, सुरेश हावरे जी के कर्तृत्व और वक्तृत्व की सुगंध इस पुस्तक में छायी है. उन पर वाचन एवम् कर्तृत्व के संस्कार इसमें दिखाई देते हैं. यह पुस्तक केवल अपने साथ लेकर मत जाइये, उसे पढ़ना भी आवश्यक है.

लेखक सुरेश हावरे जी ने कहा कि रामजन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का दिन और धारा 370 का समाप्त होना, यह दोनों दिन मेरे लिये प्रसन्नता के दिन थे. देश में विद्यमान हजारों-लाखों मंदिरों में रोजगार के अवसर पर उपलब्ध हैं. देश के विद्यापीठों को मंदिर व्यवस्थापन-प्रबंधन का पाठ्यक्रम शुरू करना चाहिए. मैं मंदिर व्यवस्थापन और कूड़े से संपत्ति की निर्मिति इन दोनों विषयों पर पुस्तकें लिख रहा हूं.

मधू मंगेश कर्णिक ने कहा कि यह साहित्यिक पुस्तक नहीं, अनुभव से सिद्ध हुआ साहित्य है. यह पुस्तक जीवन को स्पर्श करती है. सुरेश जी हावरे के व्यक्तित्व को उजागर करने वाली यह पुस्तक नई पीढ़ी को नई दृष्टि प्रदान करेगी.