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पढ़े-लिखे मनुष्यों की सारी मानवीयता क्या सिर्फ मनुष्य के लिए ही हैं?
June 3, 2020 • जनस्वामी दर्पण

पढ़े-लिखे मनुष्यों की सारी मानवीयता क्या सिर्फ मनुष्य के लिए ही हैं?

केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकलती है। उसे अनन्नास ऑफर किया जाता है। वह मनुष्य पर भरोसा करके खा लेती है।

वह नहीं जानती थी कि उसे पटाखों से भरा अनन्नास खिलाया जा रहा में फटते हैं। पटाखे उसके मुंह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह चोटिल हो जाते हैं।

मुँह में हए ज़ख्मों की वजह से वह कछ खा नहीं पा रही थी। गर्भ के दौरान भूख अधिक लगती है। उसे अपने बच्चे का भी खयाल रखना था। लेकिन मुँह में ज़ख्म की वजह से वह कछ खा नहीं पाती हैघायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हई सड़कों पर भटकती रही। इसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुकसान नहीं पहँचाती है, कोई घर नहीं तोड़ती। पानी खोजते हए वह नदी तक जा पहँचती है। मुँह में जो आग महसूस हो रही होगी उसे बुझाने का यही उपाय सुझा होगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जब इस घटना के बारे में पता चलता है तो वे उसे पानी से बाहर लाने की कोशिश करते हैं लेकिन हथिनी को शायद समझ आ गया था कि उसका अंत निकट है। और कछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही वह दम तोड़ देती है।

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जिस ऑफिसर के सामने यह घटना घटी उन्होंने दुःख और बेचैनी में इसके बारे में फेसबुक पर लिखा। जिसके बाद यह बात मीडिया में आई।