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महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर उज्जैन में दानदाताओं ने चांदी का द्वार समर्पित किया
November 10, 2019 • उज्जैन संवाददाता • धार्मिक
  • मध्य प्रदेश उज्जैन मैं महाकाल मंदिर मैं महारुद्रभिषेक हवन के साथ महाकाल को चांदी का द्वार समर्पित किया
 

मप्र / महारुद्राभिषेक, हवन के साथ महाकाल को चांदी का द्वार समर्पित

उज्जैन .महाकालेश्वर मंदिर का वैभव बढ़ता जा रहा है। मंदिर में शनिवार को चांदी का नया द्वार स्थापित हो गया। इसके लिए तीन घंटे पूजा-अर्चना, अनुष्ठान हुआ। इसके बाद कारीगरों ने द्वार को चौखट के साथ जड़ना शुरू कर दिया। इसके सहित अब मंदिर में चांदी के तीन द्वार हो गए हैं।


महाकाल प्राचीन मंदिर है। इसका आखिरी बार जीर्णोद्धार 300 साल पहले सिंधिया राजवंश द्वारा कराया गया था। मंदिर में सोने-चांदी का वैभव बढ़ना उस समय शुरू हुआ, जब 90 के दशक में मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश की स्थापना की गई। इसके बाद शिखर के छोटे-छोटे शिखरों को स्वर्ण जड़ित कलशों से मढ़ा गया। हालाकि इसके पहले मंदिर के गर्भगृह पहुंच मार्ग का द्वार प्राचीन काल से ही चांदी का है तथा 70 साल पहले गर्भगृह में भी चांदी का द्वार लगाया गया था। स्वर्ण शिखर के बाद गर्भगृह में जलाधारी, माता पार्वती, श्रीगणेश और भगवान कार्तिकेय के साथ नंदी की प्रतिमाएं भी चांदी की लगवाई गई। यह सिलसिला चलते हुए गर्भगृह की दीवारों पर चांदी मढ़ने तक भी पहुंचा।

इसके बाद नंदीगृह और गर्भगृह के बीच का द्वार चांदी का बनवाने के लिए दिल्ली के श्रद्धालु डीके गोयल सामने आए। पं. प्रदीप गुरु की प्रेरणा से 150 किलो चांदी से शेखावटी शैली में बनाए इस तीसरे चांदी द्वार को शनिवार को महाकाल को समर्पित किया गया। द्वार का निर्माण सागौन की लकड़ी पर चुरु के कारीगर माणिकलाल जांगीड़ ने किया है। अपने चार सहयोगियों की मदद से इसे बनाने में उन्हें दो महीने लगे। द्वार पर त्रिशूल, त्रिपुंड, नंदी, नाग, बिल्वपत्र, डमरू, ओम, स्वस्तिक, धतूरे के फूल, कलश जैसे शुभ प्रतीक, लाभ-शुभ, सूर्य-चंद्र और अन्य आकृतियां उकेरी गई हैं। द्वार के ऊपर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर नाम भी अंकित किया है। इस पर गर्भगृह में विराजित शिवलिंग और अखंड ज्योति भी अंकित की गई है।


पं. प्रदीप गुरु के अनुसार मंदिर में सुबह 10 बजे से मंदिर के पंडे-पुजारियों द्वारा गणपति पूजन, पुण्या वाचन, षोडशोपचार पूजन, सोलह मात्रिका पूजन, महारुद्र पूजन, लघु रुद्र पूजन के साथ हवन किया गया। द्वार का स्थापना पूजन हुआ। दोपहर 1 बजे तक चले अनुष्ठान के बाद नए चांदी द्वार को महाकालेश्वर को समर्पित किया गया। शनिवार को प्रदोष होने से द्वार स्थापना के लिए यह विशेष योग माना गया। शनिवार स्थायित्व और प्रदोष शुभ का प्रतीक है। अनुष्ठान में प्रशासक एसएस रावत, उप प्रशासक आशुतोष गोस्वामी व अन्य अधिकारी शामिल हुए।