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मध्य प्रदेश / महाकाल समेत MP के इन 6 मंदिरों की ट्रस्ट कमेटियां भंग, संचालन के लिए बना नया कानून
December 22, 2019 • जनस्वामी दर्पण विशेष संवाददाता • धार्मिक

महाकाल समेत MP के इन 6 मंदिरों की ट्रस्ट कमेटियां भंग, संचालन के लिए बना नया कानून                      उज्जैन के महाकाल (Mahakal), इंदौर के खजराना (Khajrana), मैहर के शारदा मंदिर (Sharda Mandir) समेत प्रदेश के 6 प्रसिद्ध मंदिरों की व्यवस्थाओं का संचालन अब एक ही कानून के तहत होगा. नए अधिनियम (Act) में इन मंदिरों के कोष, बजट, लेखा, चढ़ावा, दान आदि के लिए भी नियम तय किए गए हैं. इस कानून के बनते ही मंदिरों के मौजूदा ट्रस्ट भंग हो गए हैं.                                                   भोपाल. मध्य प्रदेश के 6 प्रसिद्ध मंदिरों की व्यवस्थाओं का संचालन अब एक ही कानून के तहत होगा. विधानसभा ने 'मप्र विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019' पारित कर दिया गया है. विधेयक के तहत संचालन संबंधी नियम तय कर दिए गए हैं. इस विधेयक के अधीन उज्जैन के महाकाल मंदिर, सीहोर (Sehore) के सलकनपुर मंदिर, खंडवा (Khandwa) के दादाजी दरबार, छिंदवाड़ा (Chhindwara) के जाम सांवली हनुमान मंदिर, इंदौर के खजराना गणेश मंदिर, मैहर के शारदा मंदिर की कमेटियां खत्म कर दी गई हैं. इन मंदिरों की व्यवस्थाओं के लिए अब हर मंदिर की एक कमेटी होगी. इस कानून के लागू होने के बाद मंदिरों के ट्रस्ट और वहां लागू मौजूदा अधिनियम स्वत: समाप्त हो जाएंगे.                         महाकाल समेत 6 मंदिरों के ट्रस्ट भंग                राज्य के महाकाल समेत 6 मंदिरों की समितियां और ट्रस्ट नए विधेयक के पारित होने से भंग हो जाएंगे. नए अधिनियम में इन मंदिरों के कोष, बजट, लेखा, चढ़ावा, दान आदि के लिए भी नियम तय किए गए हैं. धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मंत्री पीसी शर्मा की मानें तो नया अधिनियम लागू होने के बाद किसी भी विशेष मंदिर के लिए अलग से अधिनियम नहीं बनाना पड़ेगा. अब एक नोटिफिकेशन के जरिए मंदिरों को जोड़ा जा सकेगा. समितियां और ट्रस्ट खत्म हो जाएंगे.                                                                                              ये है नया कानून                                           >> हर मंदिर में एक समिति >> संचालन समिति के प्रमुख कलेक्टर होंगे >> हिंदू धर्म को न मानने वाला समिति का सदस्य नहीं होगा>> समिति डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को प्रशासक नियुक्त कर सकेगी, जो समिति का सचिव भी होगा >> समिति में शामिल सदस्यों को हटाने का भी प्रावधान किया गया है. » मानसिक संतुलन बिगड़ने, कोर्ट से सजा होने, मंदिर के विरुद्ध क्रिया कलाप, छुआछूत करने पर सदस्य को हटाया जा सकेगा.                                                                                                                                  ऐसी होगी मंदिरों की संचालन समिति               >> समिति में एसपी, नगर निगम आयुक्त या मुख्य नगर पालिका अधिकारी, कलेक्टर की ओर से नामित 4 द्वितीय श्रेणी स्तर के अधिकारी, सरकार द्वारा नामित दो पुजारी, राज्य सरकार की ओर से नामित दो अशासकीय ऐसे सदस्य जो धर्म-पूजा विधान के जानकार हों, कलेक्टर की ओर से नामित एक पुजारी और राज्य सरकार की ओर से विशेष आमंत्रित शामिल होंगे.                                                                                                                                            बीजेपी का आरोप है कि प्रदेश सरकार मंदिरों का कांग्रेसीकरण करने के एजेंडे पर काम कर रही है. बीजेपी ने सरकार को पूजा और परंपराओं का राजनीतिकरण ना करने की हिदायत दी है. बीजेपी ने कहा है कि सरकार को सेवा और सुविधाएं बढ़ाने पर काम करना चाहिए.