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भाजपा के हुए सिंधिय, चड़ा भगवा रंग
March 11, 2020 • विशेष सवांददाता ए. श्रीवास्तव • राजनीति

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश में जारी सियासी उठापटक के बीच दोपहर 2.50 बजे ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए। सिंधिया को उन के घर से भाजपा नेता जफर इस्लाम साथ लेकर गए थे, जो सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के मुख्य सूत्रधार रहे हैं। सिंधिया ने 27 घंटे पहले कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सिंधिया को सदस्यता दिलवाई। सिंधिया थोड़ी ही देर में भोपाल के लिए रवाना होंगे। वे शुक्रवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। शुक्रवार को ही मध्यप्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन है। 

जेपी नड्डा ने सिंधिया के भाजपा में शामिल होने पर कहा - आज हम सबके लिए खुशी का विषय है। मैं वरिष्ठतम नेता स्वर्गीय राजमाता सिंधियाजी को याद करता हूं, जो भारतीय जनसंघ में थीं। जनसंघ और भाजपा की स्थापना से लेकर विचारधारा को बढ़ाने में राजमाता सिंधियाजी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। हमारे लिए राजमाताजी आदर्श थीं, दृष्टि और दिशा देने वाली नेता रहीं। जनसंघ और भाजपा के शैशव काल से ही उन्होंने दिनरात काम किया। हमारे लिए खुशी की बात है कि उनके पौत्र ज्योतिरादित्य सिंधियाजी भाजपा में शामिल हुए हैं। मैं उनका अभिनंदन करता हूं। 

नड्डा ने कहा- ज्योतिरादित्यजी के नेतृत्व और प्रखरता से हम वाकिफ हैं। ये परिवार के सदस्य हैं। हम जानते हैं कि मोदीजी के नेतृत्व में हमारा मंत्र सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास है। मोदीजी के नेतृत्व में इन्हें मुख्यधारा में काम करने का मौका मिलेगा। सिंधियाजी को भाजपा की गतिविधियों में शामिल होने और देश के भविष्य को बदलने का मौका मिलेगा। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा - मैं सबसे पहले नड्डाजी, नरेंद्र मोदीजी, अमित शाहजी को धन्यवाद देना चाहूंगा। इन लोगों ने मुझे अपने परिवार में आमंत्रित किया, स्थान दिया। मेरे जीवन में दो तारीखें बहुत महत्वपूर्ण रहीं। कई बार जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं, जो जीवन को बदलकर रख देते हैं। पहला दिवस 30 सितंबर 2001, जिस दिन मैंने अपने पूज्य पिताजी को खोया। एक जवीन बदलने का दिवस था। दूसरी तारीख 10 मार्च 2020, जो उनकी 75वीं वर्षगांठ थी। जहां जीवन में एक नई परिकल्पना और नए मोड़ का सामना करके मैंने एक फैसला लिया। मैंने हमेशा माना है कि जिंदगी में हमारा लक्ष्य जनसेवा होना चाहिए। राजनीति केवल उस लक्ष्य की पूर्ति करने का एक माध्यम होना चाहिए, उससे ज्यादा नहीं। मेरे पूज्य पिताजी और 18-19 साल में जो वक्त मुझे मिला, प्राणप्रण और श्रद्धा के साथ प्रदेश और देश की सेवा करने की कोशिश की। मन व्यथित और दुखी है, जो स्थिति आज उत्पन्न हुई...मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूं कि जनसेवा के लक्ष्य की पूर्ति आज कांग्रेस के माध्यम से नहीं हो पा रही है।

अब सिंधिया को राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी है। इसकी घोषणा भी बुधवार को दिल्ली में होगी। सत्र के बाद सिंधिया को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया जाएगा। कमलनाथ सरकार के 6 मंत्रियों समेत 22 विधायकों ने सिंधिया के इस्तीफे की खबर लगते ही कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। सूत्र बता रहे हैं कि इस्तीफा देने वाले सिंधिया समर्थक विधायकों में से 5 से 7 को मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मंत्री पद दिया जा सकता है।