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शहीद अशफाक उल्ला ने फांसी से 3 दिन पहले अपनी बहन को पत्र लिखा - मैं हमेशा के लिए जीने वाला हूं
August 15, 2019 • विशेष संवाददाता

इंदौर : हर 19 साल पर ये अवसर आता है, जब 15 अगस्त को रक्षाबंधन भी होता है, 1947 के बाद ये सिर्फ चौथी दफा है।

इस मौके पर पढ़ें दो क्रांतिकारियों की शहादत से पहले अपने दोस्तों की बहनों को लिखी चिट्‌ठी... 

  • आजादी के बाद सिर्फ चौथी बार 15 अगस्त को रक्षाबंधन, हर 19 साल में अवसर आता है
  • भगत सिंह ने फांसी से 8 महीने पहले दोस्त बटुकेश्वर दत्त की बहन को कहा था- हौसला रखना, सब अच्छा होगा
  • अशफाक उल्ला ने अपने दोस्त सचिंद्रनाथ बख्शी की बहन को पत्र लिखा था

अशफाक उल्ला ने लिखा था- आप भी मुझे नहीं भूलेंगी : माय डियर दीदी,फैजाबाद जेल,16 दिसंबर 1927

मैं अगली दुनिया में जा रहा हूं, जहां कोई सांसारिक पीड़ा नहीं है और बेहतर जीवन के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। मैं मरने वाला नहीं, बल्कि हमेशा के लिए जीने वाला हूं। अंतिम दिन सोमवार है। मेरा आखिरी बंदे (चरण स्पर्श) स्वीकार करो... मुझे गुजर जाने दो। आपको बाद में पता चलेगा कि मैं कैसे मरा। भगवान का आशीर्वाद हमेशा आपके साथ रहे। आप सबको एक बार देखने की इच्छा है। यदि संभव हो तो मिलने आना। बख्शी को मेरे बारे में बताना। मैं आपको अपनी बहन मानता हूं और आप भी मुझे नहीं भूलेंगी। खुश रहो... मैं हीरो की तरह मर रहा हूं। - तुम्हारा अशफाक उल्ला 

भगत सिंह ने कहा था- हर हाल में धैर्य से काम लेना : प्रिय बहन, सेंट्रल जेल, लाहौर 17 जुलाई 1930 

कल रात बट्टू (बटुकेश्वर दत्त) को किसी और जेल में भेज दिया गया। अभी तक हमें पता नहीं चला है कि उसे कहां ले गए हैं। मैं तुमसे गुजारिश कर रहा हूं कि किसी हाल में बनारस छोड़कर लाहौर मत जाना। बट्टू से अलग होना मैं भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूं। असल में वह मुझे भाइयों से अधिक प्रिय है और ऐसे दोस्त से अलग होना बहुत कठिन है। तुम हर हाल में धैर्य से काम लेना और हिम्मत बनाए रखना। चिंता करने की बात नहीं है। यहां से बाहर निकलने पर सब कुछ अच्छा हो जाएगा। - तुम्हारा भगत सिंह 

टैगोर ने बंग-भंग रोकने के लिए राखी से बांधी थी हिंदू-मुस्लिम एकता की डोर : 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल को दो हिस्सों में बांट दिया। पूर्वी बंगाल मुस्लिमों के लिए और पश्चिम बंगाल हिंदुओं के लिए। इसके खिलाफ रवींद्रनाथ टैगोर ने राखी महोत्सव शुरू किया था। उनका मकसद यह बताना था कि धर्म इंसानियत का आधार नहीं हो सकता। तब रक्षाबंधन सिर्फ बहन-भाई का त्योहार नहीं रह गया था, बल्कि हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे को राखी बांध रहे थे। इसका असर यह हुआ कि 1911 में अंग्रेजों को बंगाल का विलय करना पड़ा। शांति निकेतन में आज भी राखी इसी तरह मनाई जाती है।