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राम मंदिर सुनवाई अयोध्या केस बाबरी मस्जिद के नीचे मौजूद हैं विशाल मंदिर नुमा ढांचा
October 4, 2019 • विशेष संवाददाता

 बाबरी मस्जिद के नीचे मौजूद है विशाल मंदिरनुमा ढांचा: सीएस वैद्यनाथन

 अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष ने गुरुवार को स्कंद पुराण का हवाला देकर कहा कि राम जन्मस्थान के दर्शन से मोक्ष मिलता है।...

 

माला दीक्षित, नई दिल्ली।  Ayodhya Case अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष ने गुरुवार को स्कंद पुराण का हवाला देकर कहा कि राम जन्मस्थान के दर्शन से मोक्ष मिलता है। रामलला के वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा कि स्कंद पुराण बाबर के भारत आने और वहां मस्जिद बनने से बहुत पहले का है जो उस स्थान की महत्ता साबित करता है। इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे मिले खंडहरों के निर्माण में चूना सुर्खी के प्रयोग को इस्लामिक काल का बताए जाने की मुस्लिम पक्ष की दलील का विरोध करते हुए कहा कि भारत में चूना सुर्खी का प्रयोग इस्लाम के आने से पहले से होता रहा है। हिंदू पक्ष की ओर से जवाबी दलीलें गुरुवार को पूरी कर ली गई। शुक्रवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड की अपील पर राजीव धवन बहस करेंगे।

गुरुवार को भगवान रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन और पीएस नरसिम्हा ने बहस की। उन्होंने मुस्लिम पक्ष द्वारा एएसआइ रिपोर्ट पर उठाई गई आपत्तियों और राम जन्मस्थान का महत्व व हिंदुओं की उसके प्रति आस्था को साबित करने का प्रयास किया। इसके अलावा पूजा अर्चना का अधिकार मांग रहे गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने रामलला के मुकदमे का समर्थन करते हुए कहा कि आठ से 16 फरवरी 1950 के बीच कई मुसलमानों ने सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष हलफनामा दाखिल कर कहा था कि जन्मस्थान तोड़कर वहां बाबरी मस्जिद बनाई गई थी।

हलफनामों में यह भी कहा गया था कि मुसलमानों ने 1934 के बाद वहां नमाज नहीं पढ़ी और हिंदुओं का वहां कब्जा है। निर्मोही अखाड़ा की ओर से एसके जैन ने सेवादार होने का दावा करते हुए उन्हें सेवादारी और कब्जा सौंपे जाने की मांग की। श्रीराम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पीएन मिश्रा और रंजना अग्निहोत्री ने अयोध्या जन्मस्थान भूमि को स्वयं देवता होना साबित करने के लिए स्कंद पुराण के हवाले से राम सेतु का जिक्र किया, जिसे स्कंद पुराण में देवता कहा गया है। हालांकि मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें नई दलीलें पेश करने से रोका, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और मिश्रा से कहा कि जो चीजें हाई कोर्ट में नहीं कही थीं, उन्हें यहां न रखें। पीएस नरसिम्हा ने कहा कि दस्तावेजी साक्ष्यों को भी दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।

1528 (जब अयोध्या में विवादित ढांचा बना) से पहले का काल और 1528 के बाद का काल। उन्होंने कहा कि कोर्ट को इस बात पर गौर करना चाहिए कि हिंदू उस स्थान पर हमेशा से पूजा करते आए हैं। हिंदू ग्रंथों में उस स्थान पर जाकर दर्शन करने पर जोर दिया गया है। हिंदुओं में मोक्ष प्राप्ति का महत्व है और स्कंद पुराण में कहा गया है कि राम जन्मस्थान का दर्शन करने से मोक्ष मिलता है। स्कंद पुराण में राम जन्म का निश्चित स्थान भी बताया गया है। उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण 7वीं-8वीं सदी में लिखा गया था, जो कि 1528 में मस्जिद बनने से बहुत पहले का काल था। कोर्ट को मस्जिद बनने से पहले और बाद दोनों के काल पर विचार करना चाहिए।

निर्माण में चूना सुर्खी का प्रयोग इस्लाम के आने से पहले से होता है

सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष का यह दावा गलत है कि खुदाई में मिले खंडहर में चूना सुर्खी का प्रयोग साबित करता है कि विवादित ढांचे के नीचे का निर्माण सुल्तनत काल का है। वैद्यनाथन ने कहा कि गंगा के मैदान में निर्माण में चूना सुर्खी का प्रयोग भारत में इस्लाम आने से बहुत पहले से होता आ रहा है। इस बारे में कौशाम्बी, मथुरा आदि को देखा जा सकता है। उन्होंने इस संदर्भ में प्रोफेसर जीआर शर्मा और आरएस शर्मा के लिखे इतिहास का हवाला दिया।

ढांचे के नीचे था विशाल मंदिर

वैद्यनाथन ने कहा कि एएसआइ की रिपोर्ट को देखने से पता चलता है कि विवादित ढांचे के नीचे विशाल मंदिर था, जिसे तोड़ कर मस्जिद बनाई गई थी। राजीव धवन ने दलील का विरोध करते हुए कहा कि एएसआइ रिपोर्ट में यह साबित नहीं होता कि मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाई गई थी। वैद्यनाथन ने कहा कि यह उनका दावा है।

निर्मोही ने कहा, राजनीति से प्रेरित है रामलला की ओर से दाखिल मुकदमा

निर्मोही अखाड़ा के वकील एसके जैन ने रामलला की ओर से निकट मित्र देवकी नंदन अग्रवाल का 1989 में मुकदमा दाखिल करना राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि ऐसा हिंदू मुस्लिम को बांटने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि वहां कभी भी मस्जिद नहीं थी, सिर्फ मंदिर था और 1992 में कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर ढहा दिया था। इतना ही नहीं 1992 में वहां आसपास के मंदिर भी ढहाए गए थे।

20-20 की टिप्पणी पर नाराज कोर्ट

सुनवाई के लिए कम समय बचने पर कोर्ट की ओर से पक्षकारों को जल्दी बहस पूरी करने के लिए कहे जाने पर जब एसके जैन ने कोर्ट से 20-20 मैच चलने की बात कही तो मुख्य न्यायाधीश नाराज हो गए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा 20-20 से आपका क्या आशय है। कोर्ट ने आपको पहले ही साढ़े चार दिन का समय बहस के लिए दिया और अब जवाब का भी मौका दिया जा रहा है फिर आप इस तरह की बात कैसे कह सकते हैं।