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योग से पाएं कब्ज से मुक्ति
September 2, 2019 • जनस्वामी दर्पण

योग के नियमित अभ्यास से पाचन अंगों को पर्याप्त रक्त प्राप्त होता है और वे अपनी पूरी सक्रियता से कार्य करते हैं। वैसे तो पाचन संस्थान को स्वस्थ बनाने वाले कई आसन हैं परन्तु हम यहां तीन मुख्य आसनों पर चर्चा कर रहे हैं – वज्रासन, पवन मुक्तासन और पाद हस्तासन । अपनी जीवन चर्या में इन्हें शामिल कर कब्ज से मुक्ति पायी जा सकती है ।
(1) वज्रासन – यह एक मात्र आसन है जो भोजन के तुरन्त बाद किया जा सकता है। इस आसन का अभ्यास करने से रक्त का सर्वाधिक प्रवाह पाचन अंगों की तरफ होता है और पाचक अग्री तीव्र होती है । पाचक रस पर्याप्त मात्रा में निकलते हैं तथा इसका अभ्यासी कभी कब्ज, मंद्ग्री व अजीर्ण से परेशान नहीं होता । इस आसन को करते समय बाएं स्वर (बांईं नासिका) को बन्द करके दाएं स्वर (दांईं नासिका) को चलने देना चाहिए क्योंकि दायां स्वर गर्म प्रकृतिका होता है जिससे पाचन में सहयोग प्राप्त होता है । इसी तरह भोजन करने के 10 मिनिट पूर्व बाएं स्वर को बन्द करके केवb दाएं स्वर को चलने देना चाहिए ताकि भोजन के समय व भोजन के 10-15 मिनिट तक दायां स्वर अर्थात् सूर्य स्वर जारी रह सके ।

विधि  अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर दोनों एड़ियों पर बैठ जाएं। पैरों के अंगूठे आपस में मिलाकर रखें व तलवों के ऊ पर नितम्ब रहें । कमर व पीठ सीधी रखें तथा 5 मिनिट से आरम्भ कर धीरे धीरे इस अभ्यास को 30 मिनिट तक ले जाएं । इसे किसी गद्देदार सतह पर करें और जिन्हें घुटनों या टखनों में तकलीफ हो वे इसे कदापि न करें ।

(2) पवन मुक्तासन  यह आसन पाचन अंगों को अनावश्यक वायु (पवन) से मुक्त करता है। यह आसन पाचन प्रणाली को शक्तिशाली बनाता है और आंतों की क्रियाशीलता को बढ़ाता है ।

 विधि  पीठ के बल लेटकर दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए छाती की तरफ लाएं और हाथोंसे घुटनों को इन्टरलॉक करके छाती से स्पर्श कराने का प्रयास करें । अब श्वास छोड़ते हुए गर्दन को उठाएं और नाक को घुटने से स्पर्श कराएं । यथाशक्ति इस अवस्था में रूक कर पुनः पूर्व स्थिति में आ जाएं। ऐसा ही बाएं पैर से करें और फिर दोनों पैरों को एक साथ मोड़कर करें । यह एक आवृत्ति हुई। ऐसी 3 आवृत्ति से आरम्भ कर 10 आवृत्ति तक अभ्यास को ले जाएं । जिन लोगों को कमर दर्द, गर्दन दर्द, हर्निया, स्पडिस्क आदि समस्याएं हों उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए ।

(3) पाद हस्तासन  इस आसन के अभ्यास से पाचन क्रिया सुचारू रूप से कार्य करती है और पेट की चर्बभी कम होती है । कब्ज से भी यह आसन मुक्ति दिलाता है क्योंकि इसके प्रभाव से आंतों की सक्रियता बढ़ती है । रीढ़ की हड्डी की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति के लीए यह आसन वर्जित है ।

विधि  साधे खड़े होकर दोनों हाथों को सिर से ऊ पर सीधा रखते हुए, शरीर की क्षमतानुसार पीछे झुकें । अब श्वास छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और पैरों को हाथों से स्पर्श करने का प्रयास करें। 10-30 सेकन्ड सामथ्र्य अनुसार इस अवस्था में रूक कर श्वास भरते हुए शरीर को पुनः सीधा कर ले। इस क्रमको सहजता से 3-4 बार दोहराएं । पीछे और आगे झुकने में दबाव न दें ।